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अटल बिहारी वाजपेयी

वायुमंडल की संरचना का विस्तृत वर्णन

-: वायुमंडल की संरचना :-

(Atmospheric Structure)

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वायुमंडल की संरचना को मुख्य रूप से पांच भागों में समझा जा सकता है। यह 5 भाग इसकी परतों के रूप में विभाजित होते है। वायुमंडल में पांच विभिन्न प्रकार की परतें पाई जाती हैं, जिनके आधार पर इसको वर्गीकृत किया गया है। ब्रह्मांड अनंत है और इसमें वायुमंडल एक छोटा सा भाग है।  आओ इसका वर्णन देखते हैं।


क्षोभ मंडल (Troposphere) -

यह पृथ्वी की ऊंचाई से लगभग 18 किलोमीटर ऊंचाई तक विस्तृत है। और वायुमंडल में सबसे निचली परत शोभ मंडल ही है। इसकी ऊंचाई ध्रुव पर तो 8 किलोमीटर के आसपास तथा विषुवत रेखा पर लगभग 18 किलोमीटर के आसपास है। क्षोभ मंडल में तापमान में गिरावट लगभग प्रति 165 मीटर की ऊंचाई पर 1 डिग्री सेंटीग्रेड तक होती है। अथवा 1 किलोमीटर की ऊंचाई पर लगभग 6.4 डिग्री की गिरावट देखने को मिलती है।

  • सभी वायुमंडलीय जो घटनाएं होती है- (जैसे - बादल का बनना, आंधी का चलना, वर्षा का होना आदि।) इसी मंडल में संपन्न होती है। 

इस मंडल के विभिन्न नाम है - संवहन मंडल (क्योंकि संवहन धाराएं इस मंडल की सीमा तक सीमित रहती है, इसलिए इसे संवहन मंडल भी कहा जाता है।) इस मंडल को अधो मंडल के नाम से भी जाना जाता है। 

👉 क्षोभ मंडल के ऊपर समताप मंडल आता है। क्षोभ मंडल और समताप मंडल के बीच की जो सीमा होती है, उसको क्षोभ सीमा के नाम से जाना जाता है। 


समताप मंडल (Stratosphere) -

समताप मंडल की ऊंचाई 18 किलोमीटर से लेकर लगभग 50 किलोमीटर तक है। समताप मंडल की मोटाई ध्रुव पर सबसे अधिक होती है और विषुवत रेखा पर सबसे कम होती है। कभी-कभी तो विषुवत रेखा पर यह खत्म हो जाती है। अर्थात् इसकी मोटाई शुन्य हो जाती है। 

इसी मंडल में मुख्य रूप से आंधी, बादलों का गर्जना, बिजली की गड़गड़ाहट, धूल के कण एवं जलवाष्प आदि - यह सब घटनाएं नहीं होती है। 

  • इस मंडल में वायुयान उड़ाने के लिए बिल्कुल सही मौसमी दशा पाई जाती है। 
  • कभी-कभी इस मंडल में बनने वाले विशेष प्रकार के मेघों को मुख्य रूप से मूलाभ मेघ के नाम से जाना जाता है। 

समताप मंडल में ही ओजोन गैस की एक परत पाई जाती है, जो कि मुख्य रूप से सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों को अवशोषित करती रहती है तथा हमें रेडिएशन से बचाती है। इसलिए इसे पृथ्वी का सुरक्षा कवच भी कहा जाता है। 

ओजोन परत को नष्ट करने वाली गैसों में मुख्य रूप से CFC  (क्लोरो-फ्लोरो-कार्बन) है, जो कि कई तरह से प्रसारित होती है- जैसे - एयर कंडीशनर से, रेफ्रिजरेटर या फ्रिज आदि से। 

Note - ओजोन परत में जो शरण होता है, वह CFC (क्लोरो-फ्लोरो-कार्बन) में पाए जाने वाले क्लोरीन(Cl) के कारण होता है। 

  • ओजोन परत को नापने की मुख्य इकाई का नाम डाब्सन इकाई है। 

Note - कई विद्वान ओजोन मंडल को एक अलग मंडल या परत मानते हैं, जिसकी ऊंचाई लगभग 32 किलोमीटर से लेकर 60 किलोमीटर के बीच मानी जाती है। 


मध्य मंडल (Mesosphere) -

मध्य मंडल समताप मंडल से ऊपर रहता है, जो लगभग 80 किलोमीटर तक की ऊंचाई तक फैला रहता है। मध्य मंडल की ऊपरी सीमा को मुख्य रूप से मध्य सीमा के नाम से जाना जाता है।


आयन मंडल (Ionosphere) -

आयन मंडल की ऊंचाई लगभग 80 किलोमीटर से 400 किलोमीटर के बीच मानी जाती है। 

  • इस मंडल में विद्युत से आवेशित कण पाए जाते हैं, जिनको आयन के नाम से जाना जाता हैं, इसीलिए इसे आयन मंडल कहा जाता है। 

Note - यह भाग कम वायुदाब व पराबैंगनी किरणों के द्वारा आयनिकृत होता रहता है। 

  • इस मंडल में रेडियो तंरगें पाई जाती है, जिसकी वजह से इस मंडल से पृथ्वी पर रेडियो, टेलीविजन, टेलीफोन एवं रडार जैसी सुविधाएं प्राप्त हो पाती है। संचार उपग्रह भी इसी मंडल के अंदर रखे जाते हैं।


बाह्य मंडल (Exosphere) -

यह मंडल वायुमंडल में पाया जाने वाला सबसे बाहरी मंडल होता है, जो कि आयन मंडल के ऊपर पाया जाता है। इसकी कोई ऊपरी सीमा निर्धारित नहीं होती है। यह अनंत तक फैला है। 

  • इस मंडल में मुख्य रूप से दो गैसें पाई जाती है - हाइड्रोजन और हीलियम। 

इसी मंडल के अंदर दो घटनाएं भी होती है - अरोरा आस्ट्रालिस और औरोरा बोरियालिस। जिन्हें हम उत्तरी ध्रुव प्रकाश और दक्षिणी ध्रुव प्रकाश के नाम से भी जानते हैं।

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अटल बिहारी वाजपेयी

  अटल बिहारी वाजपेयी (भारतीय राजनीति के भीष्म पितामह) (25 दिसंबर 1924 – 16 अगस्त 2018) जन्म स्थान :  ग्वालियर, मध्यप्रदेश। शिक्षा :  एम.ए. (राजनीति शास्त्र) – डी.ए.वी. कॉलेज, कानपुर (यूपी) तीन बार का प्रधानमंत्री कार्यकाल : प्रथम कार्यकाल (मई 1996 में 13 दिनों के लिए)   द्वितीय कार्यकाल (मार्च 1998 में 13 महीनों के लिए, एनडीए) तृतीय कार्यकाल (अक्टूबर 1999 से 2004, एनडीए)    ( पंडित जवाहर लाल नेहरू के बाद दूसरे राजनेता जो लगातार दो बार देश के प्रधानमंत्री चुने गए। ) राजनीतिक जीवन : • भारतीय जनसंघ के शीर्ष संस्थापकों में से एक तथा 1968 से 1973 तक उसके अध्यक्ष भी रहे। • सन् 1952 – पहला असफल लोकसभा चुनाव लड़ा।  • सन् 1957 – जनसंघ प्रत्याशी के रूप में पहली लोकसभा जीत, बलरामपुर, जिला गोण्डा (उत्तर प्रदेश)। • सन् 1957 से 1977 - जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे।  • सन् 1977 से 1979 – विदेश मन्त्री (मोरारजी भाई देसाई की सरकार में)। • 6 अप्रैल1980 - भारतीय जनता पार्टी (अध्यक्ष)। प्रमुख कार्य व योगदान : • 11  व 13 मई 1998 – पाँच सफल परमाणु परीक्...

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