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अटल बिहारी वाजपेयी

कोशिका के मुख्य भागों का विवरण

  कोशिका के मुख्य भाग 

[Main parts of cell]

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कोशिका के मुख्य भागों के अंतर्गत निम्न भाग आते हैं -

 कोशिका भित्ति -

यह पादप कोशिकाओं में पाई जाने वाली भित्ति है। यह जंतु कोशिका में नहीं पाई जाती है। इसका निर्माण सेलुलोज से होता है। 

जीवाणुओं में कोशिका भित्ति का निर्माण पेप्टिडॉगलकेन से होता है। 

कोशिका झिल्ली -

कोशिका झिल्ली मुख्य रूप से लिपिड की बनी होती है। और इसका मुख्य कार्य कोशिका के अंदर बाहर जाने व आने वाले पदार्थों को बांटना है। कोशिका झिल्ली में प्रोटीन एवं कार्बोहाइड्रेट का मिश्रण पाया जाता है।

 

तारक काय -

इसकी खोज का श्रेय मुख्य रूप से बोवेरी नामक वैज्ञानिक को जाता है। यह केवल जंतु कोशिकाओं में पाए जाने वाला भाग है।

अंतर्द्रव्यी जालिका -

यूकैरियोटिक कोशिकाओं में कोशिका द्रव्य के अंदर थेली नुमा छोटी नलिका युक्त जालिका पाई जाती है जिन्हें अंतर्द्रव्यी जालिका कहते हैं। यह दो प्रकार की होती है - खुरदरी अंतर्द्रव्यी जालिका और चिकनी अंतर्द्रव्यी जालिक।

राइबोसोम -

कोशिका के अंदर राइबोसोम को खोजने का श्रेय दो  वैज्ञानिकों रॉबिंसन व ब्राउन को जाता है। जिन्होंने इसकी खोज 1953 ईस्वी में पादप कोशिका के अंदर की थी। तथा जंतु कोशिका के अंदर इसे जी.ई. पैलेड ने सबसे पहले देखा था। रॉबर्ट ने इसका सर्वप्रथम नामकरण किया।

इसे प्रोटीन की थैली के नाम से भी जाना जाता है। यूकेरियोटिक कोशिकाओं में राइबोसोम 80s तथा प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं मेंं 70s यह दो प्रकार के होते हैं।

Note - स्तनधारियों के अंदर लाल रुधिर कणिकाओं में राइबोसोम व अंतर्दव्यी जालिका की उपस्थिति नहीं होती है।

 माइटोकांड्रिया -

इसकी खोज का श्रेय अल्टमैन को जाता है। जिसने 1896 ई. में इसे खोजा था। बेंडा नामक एक वैज्ञानिक ने इसका नामकरण माइटोकांड्रिया के रूप में किया।

कोशिका का श्वसन स्थल भी माइटोकांड्रिया को कहा जाता है। कोशिका के अंदर शक्ति का केंद्र माइटोकांड्रिया होता है। इसलिए इसे कोशिका का शक्ति ग्रह भी कहा जाता है।

माइटोकांड्रिया में विखंडन के द्वारा विभाजन होता है।

Note - केंद्रक के अलावा माइटोकांड्रिया एवं हरित लवक में ही डीएनए पाया जाता है।

गॉल्जीकाय -

इसकी खोज मुख्य रूप से कैमिलो गाल्जी नामक इटली के एक वैज्ञानिक ने की थी। यह भी एक सूक्ष्म नलिकाओं के द्वारा बना होता है। कोशिका के अंदर इसको यातायात प्रबंधक के नाम से जाना जाता है।

लाइसोसोम -

इसका निर्माण मुख्य रूप से संवेष्टन विधि के माध्यम से गॉल्जीकाय के अंदर ही होता है। इसकी खोज का श्रेय डी-डुवे नामक वैज्ञानिक को जाता है। इसे शरीर की आत्मघाती शैली के नाम से भी जाना जाता है। 

Note - स्तनधारियों और स्तनी जीवो की लाल रक्त कणिकाओं में आत्मघाती थैली नहीं पाई जाती है।

लवक -

यह मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं। जिनमें है - हरित लवक, अवर्णी लवक और वर्णी लवक। 

Note - पत्तियों का रंग पीला मुख्य रूप से उन में पाए जाने वाले प्रोटीन की मात्रा के कारण होता है।

रसधानी -

 यह कोशिका के अंदर पाया जाने वाला एक निर्जीव भाग होता है। जिसके अंदर तरल रूप में पदार्थ भरा रहता है।

 

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केंद्रक -

केंद्रक की खोज का श्रेय मुख्य रूप से रॉबर्ट ब्राउन नामक वैज्ञानिक को जाता है। कोशिका के अंदर पाए जाने वाला यह सबसे महत्वपूर्ण भाग है। केंद्रक में केंद्रक द्रव्य पाया जाता है। इस केंद्रक द्रव्य में धागे नुमा संरचना पाई जाती है, जिसे क्रोमेटिंग कहा जाता है। क्रोमेटिक का नामकरण सबसे पहले फ्लेमिंग नामक वैज्ञानिक द्वारा किया गया। इनके अलावा केंद्रक के अंदर धागे नुमा गुणसूत्र भी पाए जाते हैं, जिनकी संख्या अलग-अलग जीवों में अलग-अलग होती है। जैसे - मानव में 23 जोड़ा, चिपांजी में 24 जोड़ा, बंदर में 21 जोडे आदि।

गुणसूत्रों को ही वंशानुगती का वाहक कहा जाता है। क्योंकि यह एक जीव से दूसरे जिवों में उनके वंश के लक्षणों को पहुंचाते हैं।

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अटल बिहारी वाजपेयी

  अटल बिहारी वाजपेयी (भारतीय राजनीति के भीष्म पितामह) (25 दिसंबर 1924 – 16 अगस्त 2018) जन्म स्थान :  ग्वालियर, मध्यप्रदेश। शिक्षा :  एम.ए. (राजनीति शास्त्र) – डी.ए.वी. कॉलेज, कानपुर (यूपी) तीन बार का प्रधानमंत्री कार्यकाल : प्रथम कार्यकाल (मई 1996 में 13 दिनों के लिए)   द्वितीय कार्यकाल (मार्च 1998 में 13 महीनों के लिए, एनडीए) तृतीय कार्यकाल (अक्टूबर 1999 से 2004, एनडीए)    ( पंडित जवाहर लाल नेहरू के बाद दूसरे राजनेता जो लगातार दो बार देश के प्रधानमंत्री चुने गए। ) राजनीतिक जीवन : • भारतीय जनसंघ के शीर्ष संस्थापकों में से एक तथा 1968 से 1973 तक उसके अध्यक्ष भी रहे। • सन् 1952 – पहला असफल लोकसभा चुनाव लड़ा।  • सन् 1957 – जनसंघ प्रत्याशी के रूप में पहली लोकसभा जीत, बलरामपुर, जिला गोण्डा (उत्तर प्रदेश)। • सन् 1957 से 1977 - जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे।  • सन् 1977 से 1979 – विदेश मन्त्री (मोरारजी भाई देसाई की सरकार में)। • 6 अप्रैल1980 - भारतीय जनता पार्टी (अध्यक्ष)। प्रमुख कार्य व योगदान : • 11  व 13 मई 1998 – पाँच सफल परमाणु परीक्...

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