मिस्त्र के स्वेज नहर में लगा जाम खुल चुका है। लाल सागर और भूमध्य सागर के बीच मौजूद इस छोटे लेकिन बेहद महत्वपूर्ण जलमार्ग में एवर गिवन नाम का शिप तिरछा होकर फंस गया था और जिससे सात दिनों तक मार्ग बंद था। इस मार्ग के बंद होने के चलते नहर के दोनों छोर पर सैकड़ों जहाज और फंस गए थे।
स्वेज नहर में 23 मार्च से फंसा था जहाज।
न्यूज एजेंसी के मुताबिक ऐसे निकाला गया जहाज -
स्वेज नहर में फंसे दुनिया के सबसे बड़े जहाज को निकालने के लिए टगबोट्स की मदद ली गई। टगबोट्स वो होते हैं, जिनसे जहाज को खींचकर ले जाया जाता है। एमवी एवर गिवेन को निकालने के लिए ऐसे ही 10 टगबोट्स लगाए गए। अधिकारियों ने बताया कि जहाज को निकालने में सबसे बड़ी चुनौती ये भी थी कि इसके ऊपर 2.20 लाख टन से ज्यादा का सामान लदा हुआ था।
स्वेज नहर -
कारोबार के लिहाज से स्वेज नहर बहुत मायने रखती है। इस नहर को कारोबार के लिए 1869 में खोला गया था। ये नहर एशिया को यूरोप से और यूरोप को एशिया से जोड़ती है। दुनियाभर में तेल का जितना कारोबार होता है, उसका 7% इसी नहर के जरिए किया जाता है। वहीं वैश्विक कारोबार का 10% कारोबार भी स्वेज नहर से ही होता है। पिछले साल स्वेज नहर से सालभर में 19 हजार से ज्यादा जहाज गुजरे थे। 193 किलोमीटर से भी ज्यादा लंबी स्वेज नहर भूमध्य सागर को लाल सागर से जोड़ती है।
एमवी एवर गिवेन जहाज -
ये जहाज पनामा का है। इसे 2018 में बनाया गया था। इस जहाज की लंबाई 400 मीटर यानी 1,312 फीट और चौड़ाई 59 मीटर यानी 193 फीट है। इस लिहाज से ये दुनिया की सबसे बड़ी कार्गो शिप है। इस जहाज से एक बार में 20 हजार से ज्यादा कंटेनर ले जाए सकते हैं।
इस जहाज के फंसने से दुनियाभर में कच्चे तेल की आपूर्ति पर भी असर पड़ रहा था। नतीजा ये हुआ कि दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं। लेकिन अब, जब जहाज के निकलने और नहर के खुलने से कच्चे तेल कि सपलाई सुरू हुई तो कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भी आई हैं।



टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
Plz don't enter any spam link in the comment box.