भारत का प्राचीन इतिहास
चीन से आने वाले प्रमुख लेखक :-
फाहियान - यह चीनी यात्री लेखक, बौद्ध-भिक्षु और अनुवादक के रूप में भारत आया था। यह भारत में गुप्त वंश के राजा चंद्रगुप्त द्वितीय के दरबार में आया था। भारत में इसने मध्यप्रदेश के सामाजिक व सांस्कृतिक जीवन व व्यवस्था का वर्णन किया। इसके अनुसार यहां की जनता सुखी व समृद्ध थी। यह भारत में 65 वर्ष की उम्र में आया था तथा लगभग 14 वर्षों तक यहां रहा था। इसने अपनी यात्रा वृतांत को लिपिवध भी किया। यह मुख्य रूप से भारत में बौद्ध ग्रंथों को इकट्ठा कर ले जाने के लिए आया था। फाहियान के अनुसार भारत का व्यापार उन्नत दशा में था।
संयुगन - यह चीनी यात्री भारत में 518 ईस्वी में आया था। इसने मुख्य रूप से बोद्ध धर्म के ग्रंथों व प्राप्तियों को एकत्रित करने का कार्य किया। यात्रा करते हुए उसने यह कार्य लगभग 3 वर्षों तक किया।
ह्वेनसांग - जब यह भारत आया था तो उस समय पुष्यभूति वंश का शासन काल था और उस समय हर्षवर्धन यहां पर शासन कर रहा था। ह्वेनसांग भारत में सबसे पहले कपीसा राज्य में पहुंचा था। यह चीन से 629 ईस्वी में चला व 1 साल के बाद 630 ईस्वी में कपीसा पहुंचा। इसका मुख्य उद्देश्य भारत की नालंदा में स्थित नालंदा विश्वविद्यालय में अध्ययन करना तथा भारत से बौद्ध ग्रंथों को एकत्रित करके ले जाना था। उस समय नालंदा विश्वविद्यालय बौद्ध दर्शन के लिए विश्वविख्यात था। ह्वेनसांग भारत से 15 वर्षों के बाद 645 ईस्वी में लोट गया। इसकी प्रमुख पुस्तक का नाम "सी-यू-की" है। इसने हर्षवर्धन के समय के समाज व संस्कृति का वर्णन किया। इसने बुध की पूजा के साथ-साथ शिव तथा इंद्र की भी पूजा की।
इत्सिंग - यह सातवीं शताब्दी के अंत में भारत आया था। यह सुमात्रा से होते हुए भारत में समुद्री मार्ग के माध्यम से आया और इससे के विवरण में नालंदा विश्वविद्यालय और विक्रमशिला विश्वविद्यालय का वर्णन मिलता है।

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