-: प्राचीन भारत :-
धर्मग्रन्थ व ऐतिहासिक ग्रन्थों के आधार पर -
प्राचीन धर्मग्रन्थ - वेद ( रचनाकार - वेदव्यास )
वेद का उपदेश - बसुद्धैव कुटुम्बकम्
वेद चार हैं । ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद।
शतपथ ब्राह्मण के श्लोक के अनुसार अग्नि, वायु, आदित्य(सुर्य) और अंगिरा ने घोर तपस्या की और इन वेदों (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद) को प्राप्त किया। ऐसा माना जाता हैं कि प्रथम तीन वेदों को अग्नि, वायु, सूर्य (आदित्य), ने प्राप्त किया और संभवत: अथर्वदेव को अंगिरा ऋषि से उत्पन्न माना जाता है। उसके बाद सात ऋषियों (सप्तर्षि) को यह ज्ञान मिला। एक ग्रंथ के अनुसार ब्रह्माजी के चारों मुख से वेदों की उत्पत्ति हुई।
1. ऋग्वेद - 10 मंडल, 1028 सूक्त एवं 10,462 ऋचाएँ।
तिसरा मंडल - विश्वामित्र द्वारा रचित। (इसमें गायत्री मंत्र का उल्लेख हैं।)
सातवाँ मंडल - दसराग्य युद्घ का वर्णन।
आठवाँ मंडल - हस्तलिखित ऋचाऔं (खिल) के बारे में।
नौवाँ मंडल - देवता सोम का उल्लेख।
दशवाँ मंडल - पुरूषसूक्त ( इसके अनुसार 4 वर्ण [ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं शूद्र] होते हैं। ) के बारे में।
ऋग्वेद में ऋचाएँ - इंद्र के लिये - 250, अग्नि के लिये - 200
ऋचाओँं को पड़ने वाला - हौतृ
2. यजुर्वेद - नियमों व विधि-विधानों का संकलन
यह वेद गद्य व पद्य दोनों में लिखा हैं ।
3. सामवेद - भारतीय संगीत का जनक
4. अथर्ववेद - [रचयिता - अथर्वा ऋषि]
यह वेद कन्याओं के जन्म की निन्दा करता हैं । जादू टोनौं व अधंविश्वासों के बारे में जानकारी भी इसी वेद से मिलती हैं ।
इस वेद का प्रतिनिधि सूक्त - पृथिवी सूक्त
यूनेस्को ने 7 नवम्बर 2003 को वेदपाठ को मानवता के मौखिक एवं अमूर्त विरासत की श्रेष्ठ कृतियाँ घोषित किया।
वेदों को समझना इतना सरल नहीं है क्योंकि जो भी व्यक्ति इसके ज्ञान को प्राप्त कर लेता है। वह संभवत: ही मोक्ष को प्राप्त कर लेता है। इन वेदों में सबसे मुख्य वेद ऋग्वेद को माना गया है। जिससे मुख्य ज्ञान प्राप्त होता है।
आगे देखें - प्राचीन इतिहास ( भाग-3 )

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