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अटल बिहारी वाजपेयी

प्राचीन इतिहास ( भाग-1 )

 

इतिहास को समझने के लिए उस क्षेत्र विशेष की प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं का वर्णन किया जाता है। जिसमें वहाँ की संस्कृति का भी वर्णन छिपा होता है। आज से हम भारत के इतिहास को समझने के लिए विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेंगे।

प्राचीन समय में भारत को जम्बुद्विप, अर्थात् जामुन के वृक्षों का देश कहा जाता था

भारत के और नाम भी अलग-अलग लोगों ने दिये -

ईरानी - हिन्दू (सिन्धु नदी के नाम पर)

यूनानी - इंदे

अरबी - हिन्द

अंग्रेज - इंडिया

भारत के इतिहास को तीन भागों में बाँटा गया है।

[क्रिस्टोफ सेलियरस (जर्मन इतिहासकार) ने सबसे पहले इतिहास को तीन भागों में बाँटा]

ये तीन भाग हैं - 

1. प्राचीन भारत

2. मध्यकालिन भारत 

3. आधुनिक भारत।

हालांकि भारत को इन तीन भागों के द्वारा समझाया गया है। लेकिन भारत को समझना इतना आसान नहीं है क्योंकि यहां की रहन-सहन, वेशभूषा, और बोलियां सब अलग-अलग है। जिनके आधार पर यहां का पूर्ण तरीके से विश्लेषण कर पाना कठिन है। परंतु फिर भी इन सब विभिन्नताओं के बावजूद भी यहां पर एकता और भाईचारे की भावना पाई जाती है, जो कि प्राचीन काल से ही विद्यमान है। आज से हम आगे के भागों में भी इसके विस्तृत इतिहास के साथ-साथ भौगोलिक संरचना को भी समझेंगे

भारत उत्तर में हिमालय से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक और पूर्व में अरुणाचल प्रदेश से लेकर पश्चिम में गुजरात के कच्छ के रण तक फैला हुआ है। जो कि विश्व  मैं क्षेत्रफल की दृष्टि के हिसाब से सातवें नंबर पर आता है।

भारत को पहले सोने की चिड़िया के नाम से भी जाना जाता था। क्योंकि अंग्रेजों के आने से पहले तक भारत बहुत धनी प्रभुत्व वाला साम्राज्य था।

भारत का इतिहास प्राचीन वैदिक सभ्यता से और भारत के वेदों से लेकर हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की संस्कृति से लेकर अंग्रेजों के आगमन और वर्तमान स्थिति तक सीमित नहीं हैं। इस को समझने के बहुत से ऐसे पहलू हैं, जो इसके इतिहास को रोचक और महत्वपूर्ण बनाते हैं।


आगे देखें - प्राचीन इतिहास ( भाग-2 )

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अटल बिहारी वाजपेयी

  अटल बिहारी वाजपेयी (भारतीय राजनीति के भीष्म पितामह) (25 दिसंबर 1924 – 16 अगस्त 2018) जन्म स्थान :  ग्वालियर, मध्यप्रदेश। शिक्षा :  एम.ए. (राजनीति शास्त्र) – डी.ए.वी. कॉलेज, कानपुर (यूपी) तीन बार का प्रधानमंत्री कार्यकाल : प्रथम कार्यकाल (मई 1996 में 13 दिनों के लिए)   द्वितीय कार्यकाल (मार्च 1998 में 13 महीनों के लिए, एनडीए) तृतीय कार्यकाल (अक्टूबर 1999 से 2004, एनडीए)    ( पंडित जवाहर लाल नेहरू के बाद दूसरे राजनेता जो लगातार दो बार देश के प्रधानमंत्री चुने गए। ) राजनीतिक जीवन : • भारतीय जनसंघ के शीर्ष संस्थापकों में से एक तथा 1968 से 1973 तक उसके अध्यक्ष भी रहे। • सन् 1952 – पहला असफल लोकसभा चुनाव लड़ा।  • सन् 1957 – जनसंघ प्रत्याशी के रूप में पहली लोकसभा जीत, बलरामपुर, जिला गोण्डा (उत्तर प्रदेश)। • सन् 1957 से 1977 - जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे।  • सन् 1977 से 1979 – विदेश मन्त्री (मोरारजी भाई देसाई की सरकार में)। • 6 अप्रैल1980 - भारतीय जनता पार्टी (अध्यक्ष)। प्रमुख कार्य व योगदान : • 11  व 13 मई 1998 – पाँच सफल परमाणु परीक्...

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