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अटल बिहारी वाजपेयी

16 महाजनपद एवं राजधानीयाँ

  1. अंग - उतरी बिहार का आधुनिक मुंगेर तथा भागलपुर जिला इसके अंतर्गत आता था। राजधानी -  चम्पा  (प्राचीन नाम  मालिनी ) । 2. मगध -   वर्तमान पटना और गया का क्षेत्र।  राजधानी -  गिरिब्रज/राजगृह । यह 16 महाजनपदों में सर्वधिक शक्तिशाली साम्राज्य था। 3. काशी -  आधुनिक बनारस और उसके आसपास के क्षेत्र।   राजधानी -  वाराणसी ( वाराणसी  वरुणा एवं.                               असी  नदियों के मध्य स्थित है इसलिए                         इसका नाम वाराणसी पड़ा) । 4. कोशल - वर्त्तमान अवध का क्षेत्र इसके अंतर्गत आता था। राजधानी -  श्रावस्ती/अयोध्या । 5. वज्जि - वज्जि आठ जनों का संघ था। इनमें विदेह, लिच्छवि, कत्रिक एवं वृज्जि महत्वपूर्ण थे। राजधानी -  विदेह एवं मिथिला ।     राजधानी (लिच्छवियों की) -  वैशाली । 6. मल्ल - आधुनिक देवरिया एवं गोरखपुर क्षेत्र में स्थित मल्ल ...

क्या आप जानते हैं?

👉 माई एहणा पुत जण, जेहणा वीर प्रताप ।        अकबर सुतो ओझके, जाँण सिराणे साँप ।।          अकबर के सामंत कवि पृथ्वीराज राठौर ने महाराणा प्रताप की मृत्यु के बाद उनकि विरता के सम्मान में यह दोहा लिखा था ।  यह अकबर को उसकि औकात बताने में कोई कसर नहीं छोडता है  ।                                     👉 चार बांस चौबीस गज, अंगुल अष्ट प्रमाण ।       ता उपर सुल्तान है,मत चूके चौहान।। जब तराइन के द्वितीय युद्ध में पराजय के बाद पृथ्वीराज चौहान को गजनी भेजा गया तो चंदबरदाई भी इनके साथ गए ।  वहां पृथ्वीराज चौहान को कई यातनाएं सहनी पड़ी । एक दिन, चंदबरदाई ने पृथ्वीराज की ‘शब्दभेदी बाण’ चलने की क्षमता को मुहम्मद गोरी के सामने बहुत आकर्षक ढंग से बताया ।  गोरी की जिज्ञासा हुई इस कला को देखने की सो पृथ्वीराज को दरबार में बुलाया गया और कला प्रदर्शन का आदेश दिया गया ।  पृथ्वीराज अपनी कला का प्रदर्शन करते रहे और तभी सही मौका देखकर...